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Unknown Unknown Author
Title: रक्तचाप नियंत्रण
Author: Unknown
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जीवन-शैली में बदलाव से संभव है रक्तचाप नियंत्रण उच्च रक्तचाप एक असामान्य शारीरिक स्थिति है। इस समस्या के लक्षण स्पष्ट नहीं होते हैं इसलिए इस...

जीवन-शैली में बदलाव से संभव है रक्तचाप नियंत्रण


उच्च रक्तचाप एक असामान्य शारीरिक स्थिति है। इस समस्या के लक्षण स्पष्ट नहीं होते हैं इसलिए इसे साइलेंट किलर भी कहा जाता है। उच्च रक्तचाप होने पर सिरदर्द, आँखों में अंधेरी छाना, चक्कर आना आदि लक्षण सामने आ सकते हैं लेकिन ये अग्रिम अवस्था में ही पता चलते हैं, शुरुआती अवस्था में नहीं। आमतौर पर लक्षण प्रकट हों तो भी स्पष्ट रूप से उच्च रक्तचाप की पुष्टि नहीं होती।  
सीने में दर्द महसूस होने तक इससे पीड़ित अधिकतर लोगों को यह मालूम ही नहीं होता कि उन्हें उच्च रक्तचाप की तकलीफ है। सीने में दर्द से चितिंत होकर चिकित्सक के पास पहुँचने पर उन्हें पता चलता है कि वे उच्च रक्तचाप से पीड़ित हैं और हृदयाघात के जोखिम पर भी हैं।  

उच्च रक्तचाप के कारण आर्ट्रीज़ के कमज़ोर होने का ख़तरा काफी बढ़ जाता है। फलस्वरुप हृदयाघात, हृदयरोग व गुर्दे के रोगों की आशंका बढ़ जाती है। रक्तचाप १४०/९० या इससे अधिक बना रहने पर उच्च रक्तचाप की पुष्टि की जाती है। उच्च रक्तचाप पर नियंत्रण कई प्रकार के सम्मिलित प्रयासों से संभव है। इसका प्रयास नियमित करना आवश्यक है।

श्रम महत्वपूर्ण 
लंबे और स्वस्थ जीवन के लिए नियमित शारीरिक श्रम बेहद महत्वपूर्ण है। मोटापा, कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ना, तनाव, मधुमेहहृदय रक्त को पंप करके धमनियों और नसों के माध्यम से पूरे शरीर में पहुँचाता है। शरीर में रक्त संचार होने के लिए रक्त के दबाव की ज़रूरत होती है। सामान्य स्थिति में यह १२०/८० होता है।  

सक्रिय बने रहें 

-शारीरिक श्रम का मतलब केवल जिम जाना नहीं है। सक्रिय रहने के लिए कोई भी गतिविधि चुन सकते हैं। व्यायाम हरेक के लिए ज़रूरी है चाहे आप हार्ट अटैक के जोखिम को कम करके आंकना चाहते हों या फिर दूसरे के हृदयाघात से बचने की कोशिश कर रहे हों। इसका महत्व जानते हुए भी कई लोग व्यायाम शब्द सुनते ह असहज हो जाते हैं। जिस तरह वे बैठे-बैठे रिमोट कंट्रोल से टीवी के चैनल बदलते रहते हैं,उसी प्रकार बैठे-बैठे बीमारियों से भी बचना चाहते हैं,जो संभव नहीं है। स्वस्थ शरीर के लिए शारीरिक श्रम बेहद ज़रूरी है। 

-व्यायाम के लिए जिम,स्वीमिंग,योग आदि विभिन्न विकल्पों में से कुछ चुन सकते हैं लेकिन कई लोग व्यायाम करने से कतराते हैं। व्यायाम तो सभी के लिए जरूरी है। आलसी लोगों के लिए भी कई विकल्प मौजूद हैं,जैसे-रोज़मर्रा के कार्यों को सक्रियता से करना। बस यह ध्यान रखें कि शरीर को चलाना महत्वपूर्ण है,फिर चाहे यह योग के द्वारा हो या कि घर की सीढ़ियां चढ़ते हुए। 

-दिन में 30-40 मिनट तेज़ी से पैदल चलना भी प्रभावशाली है। यह हृदय की सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होता है। स्वीमिंग,साइक्लिंग,जॉगिंग,सीढ़ियां चढ़ना,पहाड़ों पर ट्रेकिंग करना,योग,बागवानी आदि भी कर सकते हैं। व्यायाम के विकल्प यहीं खत्म नहीं होते। फुटबॉल,हॉकी,टेनिस,बैडमिंटन आदि खेल भी आपके हृदय और फेफड़ों(कार्डियोवैस्कुलर व्यायाम) के लिए उतने ही फायदेमंद हैं। 

-गलीचे को वैक्युम क्लीनर से साफ करना या फर्श पर पोंछा लगाने का काम बोरिंग हो सकता है लेकिन यही काम चुस्ती-फुर्ती से करेंगे तो यह व्यायाम का रूप ले लेगा। उबाऊ कामों को तेज़ धुन वाले संगीत के साथ कर सकते हैं,इससे बोरियत नहीं होगी और काम के साथ व्यायाम भी हो जाएगा। 

-बचपन के मज़ेदार खेलों में रस्सी कूदना भी शामिल होता है। यह हृदय की मांसपेशियों के लिए बढ़िया व्यायाम है। आप घर पर रस्सी कूद सकते हैं और इसे कहीं भी ले जा सकते हैं। अपनी रूचि के अनुसार व्यायाम चुनें,इनसे आप ऊबेंगे नहीं और नियमित रूप से पूरे उत्साह के साथ कर भी सकेंगे। 

व्यायाम के लाभ
-तनावमुक्ति

-कार्य में बेहतर प्रदर्शन कर सकेंगे।

-अच्छी नींद 

-स्वस्थ जीवन 

-वज़न नियंत्रित रहता है। रक्त में शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में सहायक होता है।

-खून के थक्के बनने व हृदयरोगों की आशंका कम होती है।  

बदलें जीवनशैली 
-धूम्रपान न करें व किसी भी तरह के तंबाकू का सेवन न करें।

-वज़न अधिक हो तो इसे नियंत्रित करें।  

-आहार में फल व सब्ज़ियाँ पर्याप्त मात्रा में शामिल करें। वसा नियंत्रित मात्रा में लें।

-सोडियम व कैफीन की मात्रा को नियंत्रित करें।

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