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Title: एच.आई.वी/एड्स के संक्रमण का खतरा कम करने के तरीके
Author: Unknown
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यौन संबंध द्वारा एच.आई.वी/एड्स के संक्रमण का खतरा कम हो सकता है, यदि लोग यौन संबंध न बनायें, यौन संबंध स्थापित करने वाले सहयोगियों की संख्या...
यौन संबंध द्वारा एच.आई.वी/एड्स के संक्रमण का खतरा कम हो सकता है, यदि लोग यौन संबंध न बनायें, यौन संबंध स्थापित करने वाले सहयोगियों की संख्या कम करें, यदि असंक्रमित पार्टनर ही आपस में यौन संबंध स्थापित, या लोग सुरक्षित यौन संबंध स्थापित करें। कंडोम का सही और निरंतर प्रयोग ही एड्स के संक्रमण को फैलने से रोक कर जीवन को बचाया जा सकता है।
    दो असंक्रमित पार्टनरों के बीच की आपसी निष्ठा उन्हें एच.आई.वी/एड्स से बचाये रखती है। जितने अधिक सेक्स पार्टनर होंगे, उनमें से एक को हुआ एच.आई.वी/एड्स संक्रमण अन्य लोगों तक अवश्य पहुँचेगा। तथापि, किसी को भी एच.आई.वी/ एड्स हो सकता है – यह उन्हीं तक सीमित नहीं होता जिनके अनेक सेक्स सहयोगी होते हैं। किसी को भी एच.आई.वी/एड्स है या नहीं यह जानने का सबसे अच्छा तरीका रक्त परीक्षण है। संक्रमित व्यक्ति पूरी तरह स्वस्थ नजर आ सकता है।

  • जब तक दो पार्टनर आपस में ही सेक्स करते हैं और उन्हें इस बात का पता है कि दोनों ही असंक्रमित हैं, उन्हें सुरक्षित सेक्स करनी चाहिये। सुरक्षित सेक्स का मतलब नॉन-पेनिट्रेटिव सेक्स (जिस यौन क्रिया में शिश्न का प्रवेश मुँह, योनिमार्ग या गुदा में नहीं किया जाता) या हर बार की यौन क्रिया के दौरान एक नये लेटेक्स कंडोम का प्रयोग करना। (लेटेक्स कंडोम पशुओं की चमड़ी से बने हुये कंडोम से ज्यादा मुलायम होते हैं और इनमें ब्रेकेज या लीकेज का खतरा भी नहीं होता है)। कंडोम कभी भी दोबारा प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए।
  • सभी तरह के वेधनीय सेक्स के दौरान कंडोम का प्रयोग किया जाना चाहिये, जब तक यह निश्चित न हो जाये कि दोनों ही पार्टनर एच.आई.वी असंक्रमित हैं। किसी भी व्यक्ति को केवल एक बार में ही किये गये असुरक्षित सेक्स (कंडोम के बिना) के दौरान एच.आई.वी संक्रमण हो सकता है।
  • एच.आई.वी संक्रमण से बचाव के लिये वेजायनल या एनल सेक्स के दौरान कंडोम का प्रयोग किया जाना आवश्यक है।

लुब्रिकेशन के साथ आनेवाले कंडोम (स्लिपरी लिक्विड या जैल) के फटने की कम आशंका होती है। यदि कंडोम ठीक तरह से लुब्रिकेटेड (चिकनाईयुक्त) नहीं है तो, ‘वॉटर बेस्ड’ लुब्रिकेंट (चिकनाई), जैसे सिलिकॉन या ग्लिसरीन, का प्रयोग किया जा सकता है। यदि ऐसे लुब्रिकेंट उपलब्ध नहीं हैं तो, लार (मुँह की लार) का प्रयोग किया जा सकता है। तेल या पेट्रोलियम से बने हुये लुब्रिकेंट (खाना पकाने का तेल, मिनरल या बेबी ऑयल, पेट्रोलियम जैलियाँ जैसे वैसलीन, अधिकतर लोशन्स्) का प्रयोग कभी नहीं करना चाहिये क्योंकि ये कंडोम को क्षति पहुँचाते हैं। अच्छी चिकनाई युक्त कंडोम गुदा-मैथुन के दौरान बचाव के लिये आवश्यक है।
  • मुख-मैथुन के द्वारा भी HIV संक्रमण फैल सकता है। इसलिए पुरुष को कंडोम और महिलाओं को लेटेक्स का एक समतल टुकड़ा (फ्लॅट पीस) पहनना चाहिये। क्योंकि अधिकतर यौन जनित संक्रमण जननांगों के संपर्क से होते हैं, इसके पहले कि जननांगों का संपर्क आरंभ हो, कंडोम प्रयोग में लाया जाना चाहिये।
शिश्न प्रवेश रहित यौनक्रिया एच.आई.वी के संक्रमण से बचाव करने का एक और सुरक्षित तरीका है (यद्यपि यह भी सारे यौन जनित संक्रमण से पूरी तरह बचाव नहीं कर पाता)।
पुरुषों के कंडोम का सुरक्षित विकल्प महिलाओं का कंडोम है। महिलाओं का कंडोम एकदम मुलायम, लूज-फिटिंग (ढीला) पॉलीयूरेथिन झिल्ली होती है जिसे योनिमार्ग के अंदर रखा जाता है। इसके दोनों ही सिरों में मुलायम रिंग होते हैं। बंद सिरे का रिंग इस साधन को सेक्स के समय योनि के अंदर डाल कर सही जगह पकड़ कर रखता है। अन्य रिंग युक्त सिरा योनि के बाहर रहता है और लेबिया को थोड़ा-सा ढक देता है। सेक्स आरंभ होने से पहले, महिला अपना कंडोम अंगुलियों से अंदर डालती है। पुरुषों के कंडोम से बिल्कुल भिन्न, महिला कंडोम किसी भी चिकनाई के साथ डाला जा सकता है – चाहे वह लुब्रिकेंट वॉटर बेस्ड, ऑयल बेस्ड या पेट्रोलियम जैली बेस्ड क्यों न हो, क्योंकि यह पॉलीयूरेथिन से बना हुआ होता है।
अल्कोहोल पीना या मादक द्रव्य लेना इसके परिणाम को प्रभावित करता है। जो एड्स के खतरे को जानते हैं वे शायद अल्कोहोल पीने या कोई भी मादक द्रव्य लेने के बाद सुरक्षित सेक्स का महत्व भूल सकते हैं।

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