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Title: पथरी निकाल सकती है तुलसी, जानें इसके रामबाण उपयोग
Author: Unknown
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भारत के हर हिस्से में तुलसी के पौधे को प्रचुरता से उगता हुआ देखा जा सकता है। इसका पौधा बड़ा पेड़ नहीं बनता, केवल ड़ेढ़ या दो फुट तक बढ़ता है। तु...

भारत के हर हिस्से में तुलसी के पौधे को प्रचुरता से उगता हुआ देखा जा सकता है। इसका पौधा बड़ा पेड़ नहीं बनता, केवल ड़ेढ़ या दो फुट तक बढ़ता है। तुलसी को हिंदू संस्कृति में बहुत पूजनीय पौधा माना गया है। कहा जाता है कि माता तुल्य तुलसी को आंगन में लगा देने मात्र से अनेक रोग घर में प्रवेश नहीं करते हैं। यह हवा को भी शुद्ध बनाने का काम करती है। तुलसी का वानस्पतिक नाम ओसीमम सैन्कटम है। आदिवासी भी तुलसी को अनेक हर्बल नुस्खों में अपनाते हैं। चलिए आज जिक्र करेंगे तुलसी से जुड़े आदिवासियों के ऐसे 10 जबरदस्त हर्बल नुस्खों का जिनके बारे में शायद ही आपने कभी सुना हो..
1. किडनी की पथरी
किडनी की पथरी के मरीज के लिए तुलसी बहुत लाभदायक है। तुलसी की पत्तियों को उबालकर बनाया गया काढ़ा शहद के साथ नियमित रूप से 1 माह सेवन करने से पथरी मूत्र मार्ग से बाहर निकल आती है। 

2. दिल की बीमारी
दिल की बीमारी में यह वरदान साबित होती है, क्योंकि यह खून में कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करती है। जिन्हें दिल की बीमारी हुई हो, उन्हें तुलसी के रस का सेवन नियमित रूप से करना चाहिए। तुलसी और हल्दी के पानी का सेवन करने से शरीर में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा नियंत्रित रहती है और इसे कोई भी स्वस्थ व्यक्ति सेवन कर सकता है।
3. पानी को साफ करता है
आदिवासी अंचलों मे पानी की शुद्धता के लिए तुलसी के पत्ते जल पात्र में डाल दिए जाते है। इन्हें कम से कम सवा घंटे पानी में रखा जाता है। इसके बाद कपड़े से पानी को छान लिया जाता है और फ़िर यह पीने योग्य माना जाता है। 
4.संक्रमण में आराम दिलवाता है
औषधीय गुणों से भरपूर तुलसी के रस में थाइमोल तत्व पाया जाता है। जिससे त्वचा के रोगों में लाभ होता है। पातालकोट के आदिवासी हर्बल जानकारों के अनुसार, तुलसी के पत्तों को त्वचा पर रगड़ दिया जाए तो त्वचा पर किसी भी तरह के संक्रमण में आराम मिलता है। 

5. चेहरे की रंगत निखारता है
इसकी पत्तियों का रस निकाल कर उसमें बराबर मात्रा में नींबू का रस मिलाएं। यह मिश्रण रात को सोने से पहले चेहरे पर लगाएं। इससे चेहरे पर झाईयां नहीं रहती, फुंसियां ठीक होती है और चेहरे की रंगत में निखार आता है। 3. पानी को साफ करता है
आदिवासी अंचलों मे पानी की शुद्धता के लिए तुलसी के पत्ते जल पात्र में डाल दिए जाते है। इन्हें कम से कम सवा घंटे पानी में रखा जाता है। इसके बाद कपड़े से पानी को छान लिया जाता है और फ़िर यह पीने योग्य माना जाता है। 
4.संक्रमण में आराम दिलवाता है
औषधीय गुणों से भरपूर तुलसी के रस में थाइमोल तत्व पाया जाता है। जिससे त्वचा के रोगों में लाभ होता है। पातालकोट के आदिवासी हर्बल जानकारों के अनुसार, तुलसी के पत्तों को त्वचा पर रगड़ दिया जाए तो त्वचा पर किसी भी तरह के संक्रमण में आराम मिलता है। 

5. चेहरे की रंगत निखारता है
इसकी पत्तियों का रस निकाल कर उसमें बराबर मात्रा में नींबू का रस मिलाएं। यह मिश्रण रात को सोने से पहले चेहरे पर लगाएं। इससे चेहरे पर झाईयां नहीं रहती, फुंसियां ठीक होती है और चेहरे की रंगत में निखार आता है। 
6.फ्लू रोग में कारगर
फ्लू रोग में तुलसी के पत्तों का काढ़ा, सेंधा नमक मिलाकर पीने से राहत मिलती है। डांग- गुजरात में आदिवासी हर्बल जानकार फ्लू के दौरान बुखार से ग्रस्त रोगी को तुलसी और सेंधा नमक लेने की सलाह देते हैं।
7.थकान मिटाती है
पातालकोट के आदिवासी हर्बल जानकार तुलसी को थकान मिटाने वाली एक औषधि मानते है, इनके अनुसार ज्यादा थकान होने पर तुलसी की पत्तियों और मंजरी के सेवन से थकान दूर हो जाती है। 
8. माइग्रेन की समस्या में राहत मिलती है
इसके नियमित सेवन से "क्रोनिक-माइग्रेन" के निवारण में मदद मिलती है। रोजाना दिन में 4-5 बार 6-8 पत्तियों को चबाने से कुछ ही दिनों में माइग्रेन की समस्या में आराम मिलने लगता है

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